भाई दूज की कहानी | Bhai Dooj in Hindi

भारतवर्ष में रक्षाबंधन के बाद भाई बहन के लिए भाई दूज का त्योहार सबसे ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं भाई-बहन के बीच के रिश्ते को अटूट माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि भाई-बहन एक दूसरे के पूरक होते हैं।

इसीलिए भाई-बहन के बीच के पवित्र रिश्ते को और मजबूती देने के लिए भाई दूज के त्यौहार को हर घर में मनाया जाता है। पर भाई दूज मनाने का केवल यही कारण नहीं है भाई दूज क्यों मनाया जाता है ?

इसके बारे में कोई विशेष जानकारी लोगों के पास ना होने के कारण लोग इसके महत्व को नहीं समझ पाते हैं। अगर आप इस वर्ष भाई दूज का त्यौहार केवल मनाना ही नहीं चाहते बल्कि इसके महत्व को भी समझना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़िएगा।

भाई दूज का त्यौहार क्यों मनाया जाता है | Bhaidooj Kyo Manate Hain | Bhai Dooj Festival

भाई दूज हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है और इसे लोग बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। भाई दूज का त्यौहार दीपावली के 2 दिन बाद मनाया जाता है। भाई दूज के दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर यमराज से उनके लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं इसीलिए इस त्यौहार को भाई टिका के नाम से भी जाना जाता है।

स्कंद पुराण में ऐसा लिखा गया है कि भाई दूज के दिन जो बहन अपनी भाई की लंबी उम्र की प्रार्थना करने के लिए भाई दूज की पूजा करके यमराज को प्रसन्न करती हैं यमराज उनकी प्रार्थना जरूर पूरी करते हैं।

जिस तरह से हमारे हिंदू धर्म में हर त्योहार मनाने के पीछे का एक प्रमुख कारण है ठीक उसी प्रकार भाई दूज मनाने के पीछे भी एक बड़ा कारण है और इसके पीछे भी एक कथा छिपी हुई है।

पुराणों में कहा गया है कि सूर्य देव और उनकी पत्नी संज्ञा के दो बच्चे थे। उनके पुत्र का नाम यमराज और उनकी पुत्री का नाम यमुना था। एक समय ऐसा आया जब देवी संज्ञा, सूर्य देव का तापमान सहन नहीं कर पा रही थी।

इसीलिए उन्होंने अपने शरीर की एक छाया बनाकर उसे सूर्यलोक में छोड़कर स्वयं उत्तरी ध्रुव में चली गई। देवी संज्ञा के उत्तरी ध्रुव चले जाने के बाद संज्ञा की छाया और सूर्य देव के मिलन से ताप्ती और शनिदेव का जन्म हुआ।

यम और यमुना की असली माता संज्ञा के उत्तरी ध्रुव चले जाने के बाद छाया का यम और यमुना के प्रति व्यवहार थोड़ा भिन्न हो गया था। जिससे व्यथित होकर यमराज सूर्यलोक से हटकर अपनी नगरी यमपुरी बना लेते हैं।

जबकि यमुना अपनी भाई यमराज को पापियों को सजा देते हुए देखकर दुखी होने लगी और उन्होंने अंततः धरती लोक में आश्रय लेने का तय किया। एक दूसरे से दूर होने के बाद भी यमराज और यमुना में बहुत प्रेम था।

अलग-अलग स्थानों में चले जाने के बाद जैसे जैसे दिन बीतते चले गए वैसे वैसे यमराज को अपनी बहन यमुना की याद सताने लगी। यमराज सदैव अपनी बहन यमुना को याद करते रहते थे लेकिन पापियों के लेखा-जोखा में व्यस्त रहने के कारण वे चाह कर भी अपनी बहन से मिल नहीं पा रहे थे।

लेकिन कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन जब यमुना ने स्वयं यमराज को अपने घर भोजन के लिए निमंत्रण दिया। तब यमराज सोचने लगे कि लोगों के प्राण हरने के कारण उन्हें कोई भी अपने घर पर नहीं बुलाता लेकिन उनकी बहन सब कुछ जानने के बाद भी उन्हें अपने घर बुला रही है तो उन्हें अवश्य ही जाना चाहिए।

यमराज सीधे यमुना के घर के लिए निकल जाते हैं। जब यमराज यमुना के घर पहुंचते हैं तो अपने भाई को अपने घर पर आया देख यमुना बहुत ज्यादा खुश हो जाती है।

जिसके पश्चात यमुना स्नान करके अपने प्यारे भाई के लिए अच्छा सा व्यंजन तैयार करती हैं और उन्हें खाना परोसती हैं। यमुना के इतने अच्छे और प्यारे सत्कार से खुश होकर यमराज यमुना से कहते हैं मांगो तुम्हें क्या मांगना है आज तुम जो भी मांगोगी मैं तुम्हें वो दे दूंगा।

यमराज की बात सुनकर यमुना उनसे कहती हैं कि हे भाई, आप प्रत्येक वर्ष इसी दिन मेरे घर पर आया करें और इस दिन जो बहने अपने भाई के माथे पर तिलक करेगी आप से उनको भय नहीं होना चाहिए।

यमुना की बातें सुनकर यमराज उन्हें वरदान देकर और उनके लिए जो उपहार वो अपने साथ लाए थे वो उपहार उन्हें देखकर यमराज यमपुरी चले जाते हैं। और उस दिन के बाद से भाई दूज बनाने की यह परंपरा चलती आ रही है। यही कारण भी है कि भाई दूज के दिन यमराज और यमुना की पूजा की जाती है।

भाई दूज व्रत की पूरी कथा | Bhaai Dooj Vrat Katha

हम सभी जानते है कि यमराज और यमुना के कारण ही भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है लेकिन इस दिन व्रत रखने का कारण कुछ और है। भाई दूज के दिन व्रत रखने का मुख्य कारण ये माना जाता है कि इस दिन नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्री कृष्ण अपनी प्यारी बहन सुभद्रा से मिलने के लिए गए थे।

भाई के आने की खबर सुनकर बहन सुभद्रा व्रत रखकर अपने भाई के आने की प्रतीक्षा करती है और उनके आने के पश्चात उनका आदर सत्कार करके उनके माथे पर तिलक करके उनकी आरती की व उनकी पूजा करती हे।

जिसके बाद से बहनों द्वारा भाई दूज के अवसर पर व्रत रखकर व भाई के माथे पर तिलक लगाकर पूजा करने की परंपरा मनाई जाती हैं।

भाईदूज मंत्र क्या है | Bhai Duj Mantra

जैसा कि मैंने आपको बताया कि भाई दूज के अवसर पर यमराज और यमुना दोनों की पूजा की जाती है इसीलिए इस दिन पूजा के दौरान जो मंत्र बोले जाते हैं उसमें यमराज और यमुना दोनों का ही नाम आता है साथ ही साथ इस दिन कृष्ण और सुभद्रा की भी पूजा होती है तो उनके नाम का भी मंत्र में लिया जाता है –

भाई दूज के मंत्र का उच्चारण कुछ इस प्रकार से किया जाता है –

” गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को !
सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें !! “

FAQ

प्रश्न: भाई दूज का दूसरा नाम क्या है?

उत्तर: यम द्वितीया या भैया दूज ।

प्रश्न: भाई दूज के दिन किस देवता की पूजा की जाती है?

उत्तर: यमराज !

प्रश्न: भैया दूज कब मनाया जाता है ?

उत्तर: शुक्ला पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन भैया दूज मनाया जाता है।

अंतिम शब्द

उम्मीद करते हैं इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको समझ आ गया होगा कि भाई दूज क्यों मनाया जाता है ? अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करें।

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