मौनी अमावस्या पर क्यों रहा जाता है मौन, जाने इसके पीछे का कारण | Mauni Amavasya Kya Hai

हिन्दू धर्म में माघ महीने में पड़ने वाली अमावस्या का बड़ा महत्व होता है। इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस बार अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है इसलिए इसे शनि अमावस्या भी कहा जायेगा। अमावस्या तिथि का शनिवार के साथ संयोग होना इसके महत्व को और भी बढ़ा देता है। इस शुभ संयोग को स्नान-दान का महापर्व भी कहा जाता है। इस दिन दान पुण्य करने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। आज के लेख में हम आपको मौनी अमावस्या कब है, इसका शुभ मुहूर्त, इसके महत्व आदि के विषय में विस्तार से बताएंगे।

मौनी अमावस्या कब है | Mauni Amavasya Kab Hai 2023 | Shubh Muhurat

हिन्दू पंचांग के अनुसार मौनी अमावस्या 21 जनवरी, दिन शनिवार को सुबह 06 बजकर 17 मिनट से प्रारंभ होकर 22 जनवरी की सुबह 02 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार मौनी अमावस्या का पर्व 21 जनवरी को दिन भर रहेगा। ऐसे में मौनी अमावस्या से संबंधित पूजा-पाठ और दान-पुण्य का काम 21 जनवरी को ही किया जायेगा।

मौनी अमावस्या पर योग | Mauni Amavasya Yog 2023

मौनी अमावस्या पर इस वर्ष एक खास योग बन रहा है। इस योग का नाम है खप्पर योग। यह योग 30 सालों बाद बन रहा है अर्थात इससे पहले सन् 1993 में यह योग बना था। इस योग को धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस योग पर शनि संबंधी उपाय करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। माघ मास में सूर्य मकर राशि में विद्धमान है शुक्र भी सूर्य के साथ विराजमान है जबकि शनि अपनी राशि परिवर्तन कर रहा है। मौनी अमावस्या से चार दिन पहले शनि ने अपनी प्रिय राशि कुंभ में प्रवेश किया है। इस त्रिकोण की स्थिति होने पर खप्पर योग का निर्माण होता है। जब भी यह योग बनता है तो विश्व पटल पर अप्रत्याशित घटनाएं होती है।

अमावस्या तिथि पर इस वर्ष पूर्वा अषाढ़ नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग, हर्षण योग, ब्रज योग, चतुर पाद करण योग भी बन रहा है। अमावस्या के दिन ही चंद्रमा मकर राशि में प्रवेश करेंगे जो कि शनि की राशि है। यह संयोग शनि अमावस्या का महत्व और भी बढ़ा देता है। ऐसे में शनि अमावस्या पर आप शनि के मंत्रों का जाप करे व अमावस्या की पूजा करें तो शनिदेव का आर्शीवाद प्राप्त होता है।

मौनी अमावस्या पर इस विधि से करें पूजन | Mauni Amavasya Poojan Vidhi

मौनी अमावस्या के दिन प्रातःकाल ब्रहम मुहूर्त में उठ जाएं। अपने घर के मंदिर की साफ-सफाई करें। मौनी अमावस्या पर किसी पवित्र नदी जैसे गंगा, यमुना, प्रयाग, नर्मदा आदि में स्नान करने की परम्परा करें। संभव हो तो अपने शहर की किसी पवित्र नदी में जाकर स्नान अवश्य करें। अगर आप ऐसा ना कर सके तो अपने घर के नहाने वाले जल में पवित्र गंगाजल की बूंदे डालकर स्नान करें।

स्नान करते समय मंत्र ‘ऊँ हीं गंगायै, ऊँ हीं स्वाहा’ का निरन्तर जाप करते रहे। या फिर ‘गंगा च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदे सिंधु कावेरी जलेस्मिन संनिधिम कुरु‘ मंत्र का जाप करें। इस मंत्र को बोलते हुए बेसन का बना हुआ उबटन अपने शरीर पर लगाएं। ऐसा करने से गंगा स्नान के बराबर पुण्य का लाभ मिलता है। स्नान करने के बाद पूजा घर में जाकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए मौन व्रत रखने का संकल्प करें। मौनी अमावस्या वाले दिन काले तिल, गुड़, चावल, गाय का घी, कपूर इन वस्तुओं का मिश्रण करके हवन करना भी श्रेयस्कर होता है।

माघी अमावस्या के दिन अगर आप भगवान ब्रहमा जी का पूजन करते हुए गायत्री मंत्र का जाप करते हैं तो आपको विशेष फल की प्राप्ति होगी। घर परिवार में भाई-बहिन, पति-पत्नी के आपसी रिश्ते सुदृढ़ होते है।

मौनी अमावस्या की कथा | Mauni Amavasya Katha | Mauni Amavasya Story

पुरातन समय में कांचीपुरी राज्य में एक ब्राहमण और ब्राहमणी रहते थे। उसकी 8 संताने थी जिसमें 7 पुत्र और 1 पुत्री थी। जब उस दम्पत्ति की पुत्री विवाह के योग्य हुई तो उनको उसके विवाह की चिंता हुई। उन्होंने उसकी कुंडली ज्योतिषी को दिखाई। ज्योतिषी ने पुत्री की कुंडली का अध्ययन किया और दम्पत्ति को बताया कि विवाहपोपरान्त उनकी पुत्री विधवा हो जायेगी क्योंकि उसकी कुंडली में दोष है। यह सुनकर पति-पत्नी व्याकुल हो गये। उन्होंने ज्योतिषाचार्य से इस दोष को दूर करने का उपाय पूछा। तब ज्योतिषी ने बताया कि पुत्री की ग्रह दशा दूर करने के लिए सिंहल द्वीप जाओ। वहां एक सोमा नाम की धोबिन रहती है। उसने अपने घर आमंत्रित करो और उसकी आतिथ्य सत्कार करो तो पुत्री का ग्रह दोष दूर हो जायेगा। ब्राहमण ने ज्योतिषी के कथनानुसार वैसा ही किया। धोबिन का आदर सत्कार किया। ब्राहमण के आदर सत्कार से धोबिन बहुत खुश हो गई और उसने ब्राहमण की पुत्री को अखंड सौभाग्य का आर्शीवाद दे दिया।

कुछ समय बाद उस कन्या की शादी हो गई। शादी के कुछ समय बाद उसके पति की मृत्यु हो गई लेकिन धोबिन के वरदान के चलते वह पुनः जीवित हो गया। कुछ समय बाद जब धोबिन का वरदार घटने लगा तो फिर उसके पति की मृत्यु हो गई। बेटी की इस दशा को देखकर ब्राहमण दंपत्ति दुखी हो गई। उन्होंने मौनी अमावस्या वाले दिन भगवान विष्णु की पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर आराधना की। ब्राहमण की पूजा पाठ से भगवान विष्णु प्रसन्न हो गये और उन्होंने कन्या के पति को जीवित कर दिया।

मौनी अमावस्या पर क्यों रहते हैं मौन | Mauni Amavasya Ko Mauni Kyo Kehte Hai

मौनी अमावस्या पर मौन रहा जाता है लेकिन क्या आप जानते है मौन रहने की पीछे क्या परम्परा है। दरअसल मौनी शब्द मुनि से बना है। पुराने समय में मुनि अर्थात साधु-सन्यासी मौन रहकर ईश्वर की आराधना करते थे। मौन रहकर वे ईश्वर की साधना करते थे, तप करते थे और इन तपों के द्वारा अनेक सिद्धियों को प्राप्त करते थे। तभी से मौन अमावस्या पर मौन रहने की परंपरा शुरू हो गई। एक और मान्यता के अनुसार इस दिन ऋषि मनु का जन्म हुआ था जिसके चलते मौनी अमावस्या नाम पड़ा।

मौनी अमावस्या पर मौन रहने का अर्थ यह नहीं होता है कि सिर्फ मुंह से नहीं बोलना है बल्कि अपनी मन और वाणी को पूरी तरह नियंत्रित कर शांत भी रहना है। किसी भी प्रकार के गलत विचारों को अपने मन में ना लाना और एकाग्रचित होकर श्री हरि की आराधना करना है। मौन रहना एक प्रकार का तप है। अगर आप भी इस दिन मौन रहकर ईश्वर की आराधना में लीन होते है तो आपको भी अपने अन्तर्मन में एक अदृश्य शक्ति प्राप्त होगी और आपके जीवन में सकारात्मकता का वास होगा, नकारात्मकता दूर होगी। मौनी अमाावस्या पर अगर आप पूरे दिन मौन नहीं रह सकते तो कम से कम स्नान करने तक तो मौन रहना बहुत फलदायी होता है।

मौनी अमावस्या का महत्व | Mauni Amavasya Ka Mehatva

मौनी अमावस्या पर पितरों के निर्मित श्राद्ध और पूजा पाठ करना चाहिए। पितरों का तर्पण करना चाहिए। इस अमावस्या पर किए गए श्राद्ध से पितर पूरे साल के लिए संतुष्ट हो जाते हैं और पितरों का आर्शीवाद प्राप्त होता है।
इस दिन किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करने से हर प्रकार के दोष दूर होते है।

शनि अमावस्या पर अगर कुंडली में शनि दोष है तो शनि के मंत्रों का जाप करने व उनकी पूजा करने से शनि की स्थिति सुदृढ़ होती है और शनि की कृपा बरसती है।

अमावस्या के दिन सफेद चीज जैसे दूध, दही का दान करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मौनी अमावस्या पर तिल, गुड़, का दान करना चाहिए। इस दिन किए गए दान से कई यज्ञ के बराबर फल की प्राप्ति होती है। पुराणों में वर्णित है इस दिन आप जितना अधिक दान करते है उसका सौ गुना आपके पास लौटकर आताा है।

मौनी अमावस्या का व्रत करने वाले जातक के लिए गौ दान, स्वर्ण दान या भूमि दान बहुत उत्तम माना जाता है। ऐसा करने वाले जातक को हजार गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

मौनी अमावस्या पर करे ये उपाय | Mauni Amavasya Upaay

अगर आप पितृ दोष से ग्रसित है तो इससे मुक्ति पाने के लिए शनिवार अमावस्या के दिन दूध और चावल की खीर बना लें। जलते गोबर के उपलों पर इस खीर का भोग लगाये। ऐसा करने से पितृ दोष का निवारण होता है और पितरों के आर्शीवाद से घर में सुख समृद्धि आती है।

अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसो के तेल का दिया जलाये। पीपल में शनिदेव का वास होता है। अगर शनि अमावस्या के दिन शनिदेव का आर्शीवाद प्राप्त करना चाहते हैं तो शनिदेव का व्रत रखे और किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराएं।

मौनी अमावस्या के दिन अगर आप पूरे दिन मौन व्रत रहते है और किसी जरूरत मंद को कंबल, वस्त्र, दान दक्षिणा देते से तो ऐसा करने से घर की दुख-दरिद्रता दूर होती है। इतना ही नहीं कालसर्प दोष भी दूर होता है। अगर आपकी राशि पर शनि की ढैय्या या फिर साढ़ेसाती चल रही है तो उसकी पीड़ा से भी मुक्ति मिलती है।

मौनी अमावस्या के दिन अगर आप गाय माता को चावल में दही मिलाकर खिलाते है तो आपकी राशि में चंद्रमा सुदृढ़ होता है और चंद्र दोष से मुक्ति मिलता है। चंद्रमा मन का कारक होता है। ऐसे में मन भी शान्त रहता है।

मौनी अमावस्या के दिन शंख में चावल और कुमकुल डालकर मां लक्ष्मी की आराधना करने और उनके मंत्रों का जाप करने से माता लक्ष्मी का आशीवाद प्राप्त होता है। आर्थिक तंगी दूर होती है।

मौनी अमावस्या के दिन शिव शंकर भोलेनाथ के मंत्र ऊँ नमः शिवाय व महामृत्युंजय मंत्रं का जाप करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। चली आ रही समस्या दूर होती है और सारे संकट दूर होते है। इस दिन अगर आप शिवलिंग पर केसर मिश्रित दूध चढ़ाते है तो ऐसा करना स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम फल देने वाला होता है। अगर कोई कुंवारी कन्या ऐसा करती है तो शिव शंकर के आर्शीवाद से उत्तम वर की प्राप्ति होती है।

भूलकर भी न करें ये काम | Mauni Amavasya Par Na Kare Ye Kaam

मौनी अमावस्या के दिन सात्विक भोजन करना चाहिए। प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इस दिन केवल शाकाहारी भोजन ही करना चाहिए।

मौनी अमावस्या का व्रत रखने वाले जातकों को इस दिन मौन रहना चाहिए। भूले से भी किसी का अहित करने का विचार मन में नहीं लाना चाहिए। किसी को अपशब्द नहीं बोलना चाहिए।

मौनी अमावस्या पर झूठ नहीं बोलना चाहिए। इस दिन झूठ बोलना पाप करने के समान माना जाता है। झूठ बोलने से इस दिन आप जो पुण्य कर्म करते है उनका फल क्षीर्ण हो जाता है।

निष्कर्ष

मौनी अमावस्या मौन रहने व दान पुण्य करने के उद्देश्य से श्रेष्ठ अमावस्या होती है। पुराणों में वर्णित है कि मौनी अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में स्नान करने से चित्त शुद्ध होता है। दान किया गया लौटकर हजार गुना वापस आता है। तो दोस्तों आज के लेख में हमने आपको मौनी अमावस्या के विषय में सारी जानकारी विस्तार से बताई। उम्मीद करते है कि अमावस्या संबंधी दी गई जानकारी आपको पसंद आई होगी। अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों, परिजनों के साथ साझा अवश्य करें ताकि हिन्दू धर्म के व्रत, त्योहारों का व्यापक रूप में प्रचार-प्रसार हो। ऐसे ही धार्मिक और जानकारीपूर्ण लेखों को पढ़ने के लिए को हमारी वेबसाइट से जुड़े रहे।

जयश्रीराम

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *