तिरुपति बालाजी दर्शन के नियम 2024 (Tirupati Balaji Darshan Ticket)

तिरूपति बालाजी मंदिर की अनोखी है महिमा, जाने मंदिर से जुडी सभी बातें

हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की उपासना के लिए मंदिरों का निर्माण किया गया है। मंदिर एक ऐसी जगह होती है जहां जाने से न सिर्फ हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है बल्कि हमारे मन को शांति भी मिलती है। एक अनुमान के मुताबिक भारत देश में 10 लाख से भी ज्यादा मंदिर है। आज हम भारत के असंख्य मंदिरों में से अद्भुत और रहस्यों से भरपूर तिरूपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji Temple) के बारे में आपको सम्पूर्ण जानकारी देंगे। साथ ही आपको बतायंगे की आप तिरुपति बालाजी ऑनलाइन दर्शन टिकट (Tirupati Balaji Darshan Ticket 2024 ) कैसे बुक कर सकते हैं.

tirupati_balaji_darshan_ticket

तिरूपति बालाजी मंदिर कहां है (Tirupati Balaji Mandir Kaha Hai)

तिरूपति बालाजी आंध्र प्रदेश के दक्षिण पूर्वी भाग चित्तूर जिले में स्थित है। यह मंदिर समुद्र तल से 3200 फीट की ऊँचाई पर तिरूमला की पहाड़ियों पर स्थित है। तिरुमाला की सातों पहाड़ियों को भगवान विष्णु के सात सिरों की उपाधि दी गई है। मंदिर के आसपास अद्भुत घटनाएं होती है जिसके चलते इस स्थान को धरती का बैकुंठ भी कहा जाता है।

तिरूपति बालाजी मंदिर भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर देश में ही नहीं विदेशों में भी प्रसिद्ध है। तिरूपति बालाजी का नाम भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी भी है। भगवान वेंकटेश्वर स्वामी जो स्वयं भगवान विष्णु है। यह मदिर भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर है। तिरूपति बालाजी में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी अपनी पत्नी पद्यावती के साथ निवास करते है। इस मंदिर में देश-विदेश से हर साल असंख्य भक्त अपने मन की मुरादें पूरी करने आते है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान वेंकटेश्वर के समक्ष प्रार्थना करता है। उसे भगवान वेंकटेश्वर का आर्शीवाद प्राप्त होता है और उसके मन की हर मनोकामना पूर्ण होती है।

Read Also : बद्रीनाथ धाम जाने की पूरी जानकारी 

तिरूपति बालाजी की मूर्ति | Tirupati Balaji Murti History

तिरुपति बाला मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर अर्थात भगवान विष्णु जी की प्रतिमा अद्भुत व अलौकिक है। यह प्रतिमा विशेष पत्थर से बनाई गई है। यह प्रतिमा इतनी जीवंत है कि इसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे स्वयं भगवान विष्णु यहां विराजमान हैं। भगवान विष्णु की प्रतिमा पर पसीने की बूंदें देखी जा सकती हैं, जिसके चलते मंदिर में तापमान कम रखा जाता है। इस मूर्ति की सबसे रहस्यमयी बात यह है कि जब भगवान वेंकेटेश्वर की प्रतिमा पर पचाई कपूर लगाया जाता है तो इस कपूर का कोई भी प्रभाव उनकी प्रतिमा पर नहीं पड़ता है। आम तौर पर यदि यह कपूर किसी भी पत्थर पर लगा दिया जाये तो कुछ ही समय में उस पत्थर पर दरारें पड़ने लग जाती है। यह भगवान बालाजी के चमत्कार के अतिरिक्त कुछ अन्य नहीं है।

तिरूपति बालाजी मंदिर में कैसे करें पूजा | Tirupati Balaji Pooja Vidhi | Tirupati Balaji Temple Puja Vidhi

तिरुपति बालाजी मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर को प्रसन्न करने के लिए किसी विशेष पूजा पाठ करने की या किसी स्पेशल वस्तु को चढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है। तिरूपति बालाजी मंदिर में विशेष मंत्र का जप करके भगवान बालाजी को प्रसन्न किया जाता है। यह मंत्र एक शुद्ध ध्वनि कंपन है जो मन को केन्द्रित कर देता है। इस मंत्र में इतनी शक्ति होती है कि इसको निरंतर दोहराने से यह जप मंत्र प्राण में ऊर्जा भर देता है। तिरूपति बालाजी का शक्तिशाली मंत्र – ऊँ वेंकटेश्वराये नमो नमः. श्रीमन नारायण नमो नमः, तिरुमल तिरुपति नमो नमः, जय बालाजी नमो नमः.।


तिरुपति बालाजी दर्शन ऑनलाइन टिकट बुकिंग 2024 | तिरुपति बालाजी दर्शन टिकट | तिरुपति बालाजी VIP दर्शन

तिरूपति बालाजी में आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इस मंदिर में लोगों की आस्था कितनी अधिक है। तिरुपति बालाजी मंदिर में हर रोज करीब 50 हजार से 1 लाख लोग दर्शन करते हैं। यहां सामान्य दर्शन करने वालों को करीब 1 से 3 दिन का समय लगता है। भीड़ बहुत ज्यादा होने की स्थिति में इससे भी ज्यादा समय लगता है लेकिन अगर आप भीड़ से बचना चाहते हैं तो आप तिरूपति बालाजी की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग करवा कर वीआईपी दर्शन कर सकते हैं। इस प्रक्रिया से आपको कम समय में दर्शन हो जाते हैं। तिरुपति बालाजी मंदिर में वीआईपी दर्शन करने के लिए आपको मंदिर की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा। आॅफिशियल वेबसाइट पर जाने के बाद आपका नाम, फोन नंबर और आधार कार्ड नंबर जैसी सामान्य जानकारी देकर लॉग इन करना होगा। स्पेशल एंट्री पर क्लिक करने के बाद आपके सामने सारी जानकारी आ जाएगी। वीआईपी दर्शन करने के लिए आपको 300 रू0 की टिकट मिलेगी (TTD 300 Rs Ticket Online Booking)। जबकि सामान्य टिकट आपको 50 रू0 में मिल जायेगा। तिरूपति बालाजी मंदिर जाने का सबसे सही समय अक्टूबर से मार्च के बीच का होता है।

TTD 300 Rs Darshan Online Booking AvailabilityClick Here
TTD Mobile App AndroidClick Here
TTD Mobile App Apple Click here
Tirupati Balaji Mandir Online DarshaClick here

तिरुपति बालाजी दर्शन टाइमिंग | Tirupati Balaji Darshan Time | Tirupati Darshan Timings

सामान्य तौर पर तिरूपति बालाजी मंदिर के दर्शन सुबह 6.30 बजे से शुरु हो जाता हैं। तिरुमला में सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12 बजे तक कल्याणोत्सव मनाया जाता है। जब आप तिरुपति दर्शन करने जाते हैं तो तिरुपट बालाजी के दर्शन करने के भी कुछ नियम हैं। नियम के अनुसार दर्शन करने से पहले आपको कपिल तीर्थ पर स्नान करके कपिलेश्वर के दर्शन करना चाहिए। फिर वेंकटाचल पर्वत पर जाकर बालाजी के दर्शन करना चाहिए। इसके बाद पद्मावती देवी के दर्शन करना चाहिए। पद्मावती देवी का मंदिर भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की पत्नी पद्यावती लक्ष्मी जी को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि जब तक आप इस मंदिर के दर्शन नहीं करते, तब तक आपकी तिरुमला की यात्रा पूरी नहीं हो सकती जब तक इस मंदिर के दर्शन नहीं किए जाते।

तिरूपति मंदिर का प्रसाद | Tirupati Balaji Mandir Prasad | Tirupati Balaji Prasad Making

तिरूपति मंदिर में लड्डुओं को प्रसाद के रूप मे वितरित किया जाता है। जिसे प्रसादम कहा जाता है। इन लड्डुओं का इतिहास लगभग 300 साल से भी ज्यादा पुराना है। इन लड्डू को बनाने की विधि भी सबसे अलग है। इन्हें बनाने में बेसन, किशमिश, मक्खन, काजू और इलायची का इस्तेमाल किया जाता है। हर लड््डु का वजन 174 ग्राम होता है। इन लड्डुओं को बनाने के लिए यहां के कारीगर तीन सौ साल पुरानी विधि का प्रयोग करते हैं। लड्डुओं का निर्माण बालाजी मंदिर की रसोई में किया जाता है। इस रसोई का नाम पोटू है।

इन लड्डुओं की सबसे खास बात यह है कि अगर आप यहां से लड्डु ले जाकर घर पर बनाकर खाना चाहे तो आपको वह स्वाद नहीं मिलेगा। यह मंदिर का चमत्कार ही है, कि लाख कोशिशों के बाद भी लोग यहां जैसे लड्डू घर पर नहीं बना पाते। यह लड्डु कई दिनों तक खराब नहीं होता है और इसे आप यहां से ले जाकर कई दिनों तक रखकर खा सकते है। इन लड्डुओं की कीमत 10 रूपये से लेकर 25 रूपये तक ही है। इन लड्डुओं की सुरक्षा भी काफी कड़ी होती है इन लड्डुओं को यहां से ले जाने के लिए आपको एक सुरक्षा दायरे से होकर गुजरना पड़ेगा। जिसमें सुरक्षा कोड और बायोमेट्रिक विवरण शामिल है।

यह भी देखें : सिद्धिविनायक मंदिर दर्कीशन कैसे करें?

तिरूपति मंदिर में बाल देने की प्रथा | तिरुपति बालाजी बाल देने का महत्व | Tirupati Balaji Hair Donation

तिरुपति मंदिर में लोग अपने बाल दान करके या मुंडन करवाकर आते हैं। यहां पर बालों के दान के बारे में कहा जाता है कि अगर कोई मनुष्य यहां बाल दान करता है तो उसके जीवन से सारी परेशानियां दूर हो जाती है। साथ ही दान देने वाले व्यक्ति पर देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। अगर आप सोचते है कि मंदिर में केवल पुरुष ही अपने बाल कटवाते हैं, तो आप गलत हैं, यहां बच्चों और पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी अपने बाल कटवाती हैं। महिलाएं भी धन प्राप्ति के लिए कई मन्नतें मांगती हैं और इच्छा पूरी होने पर अपने लंबे बालों को दान करती हैं। यहां पर मनुष्य अपने बालों के रूप में अपने सारे पाप और बुराइयाँ मंदिर पर छोड़ जाता है तथा उसके सभी दुख देवी लक्ष्मी खत्म कर देती है। इस मंदिर पर रोजाना करीब 20 हजार लोग अपने बाल दान कर देते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पर लोग आकर अपनी मन्नत मांगते है और जब उनकी मान्यता पूरी हो जाती है तो वह यहां आकर अपने बाल दान कर देते हैं।

तिरुपति में बालों को दान करने की पीछे की पौराणिक कथा | Tirupati Balaji Mandir Baal Kyu Dete Hai

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में भगवान बालाजी की मूर्ती पर ढेरों चीटियों का एक पहाड़ बन गया था। उस पहाड़ पर रोजाना एक गाय आया करती थी और दूध देकर चली जाती थी। जब गाय के मालिक को इस बारे में पता चला तो, वो नाराज हो गया और उसने कुल्हाड़ी से गाय का वध कर डाला। इस हमले के दौरान बालाजी के सिर पर भी चोट आई, साथ ही उनके सिर के बाल भी गिर गए। तब बालाजी भगवान की मां नीला देवी ने अपने बाल काटकर बालाजी के सिर पर रख दिए। इस तरह भगवान के सिर का जख्म बिल्कुल ठीक हो गया। खुश होकर भगवान ने उनसे कहा कि बाल शरीर की सुंदरता को बढ़ाते हैं और आपने मेरे लिए उनका त्याग कर दिया। आज से जो भी मेरे लिए अपने बालों का त्याग करेगा, उनकी हर इच्छा पूरी की जाएगी। तब से भक्त अपने बालों को बालाजी मंदिर में अपने बालों का दान कर रहे हैं।

तिरूमति बालाजी मंदिर के चमत्कारिक रहस्य | Tirupati Balaji Mandir Rahasya | Tirupati Balaji Miracles in Hindi

तिरूपति बालाजी का मंदिर अलौकिक और अनेक रहस्यों से भरा हुआ है। इस मंदिर में ऐसे अनेक रहस्य है जिनका जवाब आज तक नहीं मिला है। कुछ ऐसे अनसुलझे प्रश्न है जिनका जवाब विज्ञान के पास भी नहीं है।
तिरूपति में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर जो बाल लगे हैं वो असली हैं। आश्चर्य की बात यह है कि यह बाल हमेशा मुलायम रहते है और कभी भी उलझते नहीं हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान वेंकटेश्वर खुद उपस्थित हैं।

जब हम मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश करते है तो ऐसा लगता है कि भगवान श्री वेंकेटेश्वर की मूर्ति गर्भ गृह के मध्य में है, लेकिन जैसे ही आप गर्भगृह के बाहर आएंगे तो आपको ऐसा लगेगा कि भगवान की प्रतिमा दाहिनी तरफ है। यह भ्रम है या चमत्कार इसका जवाब आज तक नहीं मिला है।

ऐसी मान्यता है कि भगवान वेंकटेश्वर के रूप में मां लक्ष्मी भी समाहित हैं जिसकी वजह से श्री वेंकेटेश्वर स्वामी को स्त्री और पुरुष दोनों के वस्त्र पहनाने की परम्परा है।

भगवान वेंकेटेश्वर स्वामी के मंदिर से 23 किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है। इस गांव में गांव के नागरिकों के अलावा कोई बाहरी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। बालाजी मंदिर में चढ़ाया जाने वाला पदार्थ जैसे की फूल, फल, दही, घी, दूध, मक्खन आदि सभी वस्तुएं इसी गांव से आती हैं।

तिरूपति मंदिर में मुख्य द्वार के दरवाजे पर दाईं तरफ एक छड़ी है। इस छड़ी के बारे में ऐसी मान्यता है कि बाल्यावस्था में इस छड़ी से ही भगवान वेंकेटेश्वर की पिटाई की गई थी जिसकी वजह से उनकी ठुड्डी पर चोट लग गई थी। तब से आज तक उनकी ठुड्डी पर हर शुक्रवार को चंदन का लेप लगाया जाता है। ताकि उनका घाव भर जाए।

गुरुवार के दिन भगवान वेंकेटेश्वर को चंदन का लेप लगाया जाता है। भगवान के श्रृंगार को हटाकर उन्हें स्नान कराकर उनकी प्रतिमा पर चंदन का लेप लगाया जाता है और जब इस लेप को हटाया जाता है तो भगवान वेंकेटेश्वर के हृदय में माता लक्ष्मी जी की स्पष्ट आकृति दिखाई देती है।

यदि कोई भक्त भगवान श्री वेंकटेश्वर की मूर्ति पर कान लगाकर ध्यान से सुनता है तो उसे सागर की लहरों का शोर सुनाई देता है।

तिरूपति मंदिर से जुड़ा एक और ऐसा अद्भुत रहस्य है जिसे चमत्कार से कम नहीं कहा जा सकता। श्री वेंकेटेश्वर स्वामी के मंदिर में हमेशा एक दीपक जलता रहता है और सबसे ज्यादा चैंकाने वाली बात यह है कि इस दीपक में कभी भी तेल या घी नहीं डाला जाता। इतना ही नहीं आज तक यह भी पता नहीं चला है कि इस दीपक को सबसे पहले किसने और कब प्रज्वलित किया था।

भूलकर भी तिरूपति मंदिर में ऐसा ना करें | Tirupati Balaji Temple Rules | तिरुपति बालाजी के दर्शन नियम 2024

  • तिरूपति मंदिर की अधिकारी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक इस मंदिर में भगवान की पूजा के अलावा अन्य किसी भी उद्देश्य से मंदिर में ना जाएं।
  • मंदिर परिसर में या उसके आसपास जूते-चप्पल न पहनें।
  • मंदिर के अंदर कभी भी दण्डवत प्रणाम न करें।
  • तिरूपति बालाजी मंदिर में दिए गए प्रसाद को कभी भी जमीन पर ना गिरने दे।
  • तिरुमाला में मांसाहारी भोजन न करें। ना ही शराब या अन्य किसी नशीले पदार्थ का सेवन न करें और धूम्रपान न करें।
  • मंदिर परिसर के अंदर हेलमेट, टोपी, पगड़ी और टोपी न पहनें।

तो ये थी दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में से एक तिरूपति बालाजी मंदिर के बारे में सम्पूर्ण जानकारी। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा तो अपने शेयर अवश्य करें जिससे हिन्दू धर्म के मंदिर, तीर्थों का व्यापक प्रचार-प्रसार हो।

Read Also:

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *