पौष पूर्णिमा कब है | Paush Purnima Vrat

पौष पूर्णिमा विशेष: पौष पूर्णिमा पर जरूर करें ये उपाय, जाग उठेगा सोया हुआ भाग्य

हिन्दू धर्म में पूर्णिमा तिथि का बहुत महत्व है। पूर्णिमा को अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है, कुछ लोग पूर्णमासी तो कुछ लोग इसे पौर्णिसी के नामों से भी पुकारते हैं। हर माह के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा कहलाती है। इस तरह 12 माह में 12 पूर्णिमा पड़ती है। इसे हिन्दू महीनों के हिसाब से अलग-अलग नाम दिये गये है।

पूर्णिमा की रात वह रात होती है जब चंद्रमा अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से युक्त होकर पृथ्वी पर अपनी चांदनी बिखेरता है। पूर्णिमा वाले दिन चन्द्रमा काफी प्रभावशाली होता है जिसका मानव के मन और मस्तिष्क पर विशेष प्रभाव पड़ता है। नया साल 2023 शुरू हो चुका है। ऐसे में सभी लोग वर्ष की पहली पूर्णिमा के बारे में जानना चाहते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि नए साल की पहली पूर्णिमा होगी। यह पौष पूर्णिमा कहलायेगी। पूर्णिमा की रात चंद्रमा और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। आज के लेख में हम जानेंगे कि पौष पूर्णिमा कब है, पूर्णिमा के दिन क्या है पूजा का शुभ-मुहूर्त, पूर्णिमा के दिन कैसे पूजा करें आदि के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

पौष पूर्णिमा कब है | Paush Purnima Kab Hai 2023

साल 2023 की पहली पूर्णिमा 06 जनवरी 2023, दिन शुक्रवार को मनाई जायेगी। पौष माह भगवान सूर्य देव का माह होता है। पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है। ऐसे में सूर्य और चंद्रमा का अद्भूत संगम पौष पूर्णिमा की तिथि को ही होता है। पौष पूर्णिमा के दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों की पूजा करने से मनोवांछित कामना की पूर्ति होती है व जीवन में चली आ रही हर बाधा का निवारण होता है। पौष पूर्णिमा शुक्रवार को पड़ने के कारण इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से भी आपके जीवन में चली आ रही सभी बाधाएं दूर होगी। पौष पूर्णिमा के दिन स्नान व दान का बड़ा महत्व होता है। इस दिन दान करने से मनुष्य के इस लोक के साथ-साथ परलोक में भी कल्याण होता है।

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पौष पूर्णिमा शुभ मुहूर्त | Paush Purnima Timing

पौष पूर्णिमा दिनांक 06 जनवरी 2023 को रात 02 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 07 जनवरी 2023 को सुबह 04 बजकर 37 मिनट पर होगा। हिन्दू धर्म में किसी भी तिथि का मान उदया तिथि को देखकर ही किया जाता है। ऐसे में पौष पूर्णिमा इस बार 06 जनवरी को ही मनाई जाएगी।

पौष पूर्णिमा पर इस बार तीन शुभ योग भी पड़ रहे है। ब्रह्म योग, इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग। इन शुभ योगों में पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इंद्र योग 06 जनवरी 2023, सुबह 08 बजकर 11 मिनट से प्रारम्भ होकर 07 जनवरी 2023, सुबह 08 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। वहीं ब्रह्म योग 05 जनवरी 2023, सुबह 07 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर 06 जनवरी 2023, सुबह 08 बजकर 11 मिनट तक तथा सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 12 बजकर 14 मिनट से लेकर 7 दिसंबर सुबह 06 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। ऐसा माना जाता है कि शुभ योग में पूजा करने से पूजा का दोगुना लाभ मिलता है। इसलिए पूर्णिमा तिथि पर शुभ योग में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना श्रेयस्कर होगा।

पौष पूर्णिमा पर इस तरह करें पूजा | Paush Purnima Pooja Kaise Kare

पौष पूर्णिमा वाले दिन ब्रहम मुहूर्त में उठकर नित्य क्रियाओं से निवृत्त होकर किसी पवित्र नदी में जाकर स्नान करें। अगर ऐसा संभव ना हो तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर सभी पवित्र नदियों का ध्यान करके स्नान करें। स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनकर पूर्णिमा के व्रत का संकल्प लें। तत्पश्चात तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य देव को अघ्र्य दें। इसके बाद श्री हरि भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा करें। भगवान को पुष्प, धूप, दीप, गंध अर्पित करें। उसके बाद भगवान सत्यनारायण भगवान की कथा करें। कथा समाप्त होने के बाद भगवान विष्णु की आरती करें और पंचामृत, फल, मिठाई का भोग भगवान विष्णु को लगाएं। संध्या काल में चंद्रमा का दर्शन करें और उन्हें कच्चे दूध में चीनी व चावल मिलाकर अर्पित करें और रात्रिकाल में माता लक्ष्मी की पूजा करें।

पौष पूर्णिमा व्रत में क्या खाये | Paush Purnima Vrat Ke Niyam

पौष पूर्णिमा का व्रत करने वाले जातक को सूर्योदय से लेकर पूर्णिमा की समाप्ति तक अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। अगर आप निराजल व्रत करने में असमर्थ हैं तो दिन में एक बार फल और दूध का सेवन कर सकते हैं। कई बार फलाहार ना करें क्योंकि इससे व्रत की पवित्रता भंग होती है। किसी भी प्रकार के अनाज, दालें और नमक का सेवन भी व्रत के दौरान नहीं करना चाहिए।

पौष पूर्णिमा का महत्व | Paush Purnima Ka Mehetva

पौष पूर्णिमा का शास्त्रों में बहुत महत्व बताया गया है। इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा का पाठ करने वाले व्यक्ति को अपने जीवन के सभी संकटों से छुटकारा मिलता है और पाठ करने वाले श्रृद्धालु को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पौष पूर्णिमा के दिन यदि कोई मनुष्य किसी पवित्र नदी जैसे गंगा, यमुना, त्रिवेदी आदि में जाकर डुबकी लगाता है तो उसे पापों से छुटकारा मिलता है और मोक्ष प्राप्ति का द्वार खुल जाता है। पौष पूर्णिमा का दिन मनुष्य को अपने भीतर के अंधकार को समाप्त करने और आत्मज्ञान के मार्ग पर चलने का एक अवसर है।

पौष पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। ऐसे में इस दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन अवश्य कराएं। इस दिन कंबल, गुड़, तिल जैसी चीजों का दान करना भी शुभ कल्याणकारी माना जाता है।

पौष पूर्णिमा के उपाय | Paush Purnima Ke Upaay

पौष पूर्णिमा पर लोग अपनी किस्मत चमकाने को कई उपाय करते है। इन उपायों को करने से भगवान श्री हरि विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी का भी आर्शीवाद प्राप्त होता है। आईये हम इन्हीं उपायों को जानते है-

पौष माह में सर्दी जोरों पर रहती है। ऐसे में इस दिन सर्दी से बचाव वाली चीजे जैसे गर्म कपड़े, कंबल आदि को किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को अवश्य दान करना चाहिए। आप अनाज, फल, सब्जी का दान भी कर सकते हैं। अगर आप दान करने में समर्थ नहीं हैं तो आप किसी मंदिर में जाकर अपनी इच्छा अनुसार रुपए भी दान कर सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन दान करने वाले व्यक्ति को अश्वमेघ यज्ञ के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

घर में किसी कार्य में बाधा आ रही हो, तमाम प्रयास करने के बाद भी कार्य में सफलता ना मिल रही हो तो पौष पूर्णिमा के दिन घर के मुख्य द्वार पर अशोक या आम के पत्ते का तोरण बनाकर घर के दरवाजे पर लगाएं। ऐसा करने से माता लक्ष्मी की कृपा बरसती है और बिगड़ा कार्य बन जाता है।

पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी चमक बिखेरता है। इस दिन रात्रि जागरण का विशेष महत्व होता है। रात्रि जागरण करने वाले श्रद्धालु को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आर्शीवाद प्राप्त होता है। पुराणों में ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा की रात जो भी मनुष्य सो जाता है तो उसका भाग्य भी सो जाता है। हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर फल की प्राप्ति इस रात जागरण करने से मिलती है।

पूर्णिमा के दिन विष्णु सहसत्रनाम और कनकधारा स्रोत का पाठ करने से आर्थिक समस्या दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की सच्चे मन से पूजा-पाठ करने से सभी संकट और बाधाओं से छुटकारा मिलता है। इस दिन माता लक्ष्मी के किसी भी मंत्र का जाप करने वाले जातक पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है।

पौष पूर्णिमा पर क्या न करें | Paush Purnima Me Kya Nahi Karna Chahiye

पौष पूर्णिमा पर कुछ कार्यों को करने से जहां भगवान श्री हरि और माता लक्ष्मी का आर्शीवाद प्राप्त होता है। वही कुछ ऐसे कार्य भी होते है जिनको पूर्णिमा के दिन करने की मनाही होती है। यदि आप इन कार्यों को करते हैं तो माता लक्ष्मी आपसे नाराज हो जाती है और आपको आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आईये जानते है कि पूर्णिमा के दिन किन कार्यों को करना वर्जित होता है-

पूर्णिमा वाले दिन शाम को या रात को घर में झाडू नहीं लगाना चाहिए। झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में शाम को झाडू लगाने से माता लक्ष्मी नाराज हो जाती है और उनके क्रोध का सामना करना पड़ता है। सूर्यास्त के बाद भूलकर भी घर में झाडू नहीं लगाना चाहिए।

पूर्णिमा वाले दिन माता लक्ष्मी को भूलकर भी तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाने चाहिए। तुलसी जी भगवान श्री हरि विष्णु प्रिया है लेकिन माता लक्ष्मी को अप्रिय है। ऐसे में यदि आप माता लक्ष्मी को तुलसी के पत्ते अर्पित करते हैं तो आपकी तरक्की बाधित होगी।

पूर्णिमा वाले दिन भूलकर भी आपको तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे माता लक्ष्मी नाराज हो जाती है और आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इस दिन किसी गरीब, असहाय व्यक्ति को अपशब्द या बुरा बोल भी नहीं बोलना चाहिए।

पूर्णिमा की रात में दही का सेवन न भूलकर भी ना करें। रात में दही का सेवन करने से सेहत खराब होती है। साथ ही धन की हानि भी हो सकती है।

पूर्णिमा या किसी भी दिन यदि आप अपने घर के बड़े-बुजुर्गो से व्यर्थ का वाद-विवाद करते है। उनका सम्मान नहीं करते है तो आपको चंद्र दोष का सामना करना पड़ेगा। चंद्र दोष के चलते आपकी मानसिक व आर्थिक समृद्धि बाधित होती है। चंद्र दोष को दूर करने के लिए पूर्णिमा की तिथि को चंद्रमा की विशेष पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से चंद्र दोष दूर होता है। चंद्रमा मन का कारक होता है। यदि चंद्रमा प्रबल होगा तो आपकी सुख-समृद्धि में वृद्धि होगी।

पूर्णिमा तिथि के देव चंद्रमा हैं और उनके आराध्य हैं भगवान शिव। पूर्णिमा वाले दिन इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि आप भगवान भोलेनाथ शिव शंकर का किसी भी तरह से अपमान ना करें। अगर भूलवश आपसे ऐसा हो जाता है तो आपको भोलेनाथ के कोप का भाजन बनना पड़ेगा।

पूर्णिमा की तिथि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित तिथि है। इस दिन श्री हरि के साथ माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। पूर्णिमा का व्रत करने वाले जातक पर भगवान विष्णु और चंद्रमा की कृपा प्राप्त होती है और व्रत करने वाले जातक की सभी मनोकामना पूर्ण होती है। मित्रों, आज के लेख में हमने पौष पूर्णिमा विषयक सारी जानकारी आपको प्रदान की। उम्मीद करते है उक्त जानकारी आपके जीवन के लिए कल्याणकारी साबित होगी। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा तो इसे अपने दोस्तों, परिजनों के साथ सोशल मीड़िया पर साझा अवश्य करें, जिससे हिन्दू धर्म के व्रत, त्योहारों का व्यापक प्रचार-प्रसार हो। ऐसे ही अन्य धार्मिक लेखों को पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट से जुड़े रहे। जयश्रीराम

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